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मेरी मीठू,

  • Writer: Pahadan
    Pahadan
  • 3 hours ago
  • 2 min read

Date- 03-12-2025


मेरी प्यारी मीठू,

एक रोज़ तुमने मुझसे कहा था की शादी के दिन मैं तुम्हें एक ख़त दूँ, और मैंने बताया कि वो तो मैंने पहले से लिख रखा है।

तुम जानती हो, इस ख़त को मैंने अपने मन में ना जाने कितनी बार लिखा,

मैंने इसे लिखा जब तुमने पहली बार बताया कि तुम्हें शादी करनी है

और उस रात ट्रेन मैं जब मैं तुम्हारे रोके के लिए आ रही थी।

मैंने इसे लिखा शादी की तैयारी करते वक्त, और तब जब तुमने अपने लेंघे के ट्रायल की तस्वीर भेजी,

और जोड़ी उन्मे कुछ पंक्तिया उस दिन भी जब तुम अपने घर से जा ले रही थी, और मेरे एक काँधे पर रूमी था और दूसरी तरफ़ तुम्हें मैंने गले लगाया।

लेकिन पता है इतने महीनों से इसे लिखने के मेरे तमाम प्रयासों के बाद भी मैं कभी पेन और पेपर पर इसे सही से उतार नहीं पाई।

जानती हो क्यों?

क्योंकि हर बार तुम, तुम्हारी शादी और ये पूरी यात्रा के बारे में सोच कर मेरी आँखों के आगे सब धुंधला हो जाता, और निकल आते कुछ आँसू।

मीठू, हम दोनों के हिस्से कभी ख़ुद की बहन नहीं आई।

पर, इसकी कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी। क्योंकि मेरे हिस्से आई तुम, और तुम्हारे छूटकी दीदी!

साल में एक बार गर्मियों की छुट्टी में सिर्फ़ मिलने भर से फिर हर छुट्टी ढूँडकर मिलने तक की इस यात्रा में देखो अब हम कहाँ आ खड़े हैं।


कल तुम्हारी शादी है, और जितनी ख़ुशी मुझे इस बात की है, उतना ही मेरे भीतर का एक हिस्सा है, जो डर रहा है, की कहीं तुम मुझसे दूर ना हो जाओ।

“सुनो”

“दीदी”

“एक चीज़ बताओ…”

और फिर इसके नीचे टन्न टन्न करके एक बार में तुम्हारे कमसे कम 10 मेसेज कहीं अब कम ना हो जाएं।

कहीं हम बंद ना कर दें दिखाना की किस सूट के साथ कौनसे झुमके पहने, छूट ना जाए एक दूसरे का सामान लेना, या कम हो जाया करना इंतज़ार छुट्टियों में मिलने का।

और इन सब से ज़रूरी, कहीं हम भूल ना जाये हाल-ए-दिल बताना।

तुम्हारे दूर होने का दुख तो है,

पर दूर होना तो स्वाभाविक है।

क्योंकि कलसे बसाना है तुम्हें अपना एक घर। बनाओगी नए रिश्ते और सहेजोगी अपनी एक गृहस्थी।

लेकिन मुझे यकीन है कि तुम दोनों सिरों को हमेशा जोड़ोगी,

और नहीं छूटेगी हमारी बातें, हँसना, घूमना।

तुमसे मिलने जब मैं आऊँगी तो बनाऊँगी तुम्हारे लिए बनाना ब्रेड और कुकीज़, ख़रीदोगी तुम मेरे लिए अपने जैसे क्लचर और बैग्सऔर देर रात तक हमारी चर्चा में होंगी कविताएँ, पुराने प्रेमी, पॉलिटिक्स और रिश्तेदार भी।

और हाँ,

हर बार जब उलझोगी तुम किसी परिस्थिति में, तो पीछे खड़ा पाओगी अपनी छुटकी दीदी और GIG को।

क्योंकि मीठू, जीवन में बहनों की एहमियत तो हमने अपनी माँओं से सीखी है!



Date- 04-12-2025

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