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आज तुम्हारा जन्मदिन होता

  • Writer: Pahadan
    Pahadan
  • Jan 16
  • 3 min read

ग्यारह जनवरी, आज तुम होते तो तुम्हारा जन्मदिन होता।

कमाल की बात है कि इस दिन की मेरे पास बहुत ज़्यादा यादें नहीं हैं। अपने तो काफ़ी सारे जन्मदिन मुझे याद हैं, किस साल मैं कहाँ थी, क्या किया था, कुछ के तो कपड़े भी याद हैं। पर ना जाने क्यों तुम्हारे जन्मदिन की यादें थोड़ी कम हैं।

याद नहीं आ रहा ऐसा क्यों भला। हम मनाते नहीं थे क्या, आप रहते नहीं थे, या ना जाने क्या। आज तीव्र इक्छा हो रही है की तुम होते तो पूछती कि “पापा आप अपना जन्मदिन कैसे मनाते थे? आपके समय में केक तो होते नहीं थे, तो फिर क्या करते थे? तोहफ़ों का चलन था क्या तब?”


अब तुम हो नहीं, तो पूछ नहीं सकती। पर हाँ जबाव ज़रूर मालूम है।

झुँझला के तुम यही कहते “ये बर्थडे - फड़्डे हमारे नहीं होते थे। आज कल के बेकार के चोचले हैं।”

शुरुआती जन्मदिन तो तुम्हारे सच में याद नहीं। माँ कहती हैं की जन्मदिन के दिन वो सुबह हलवा बनाती थी और शाम को सब बाहर खाने के लिए जाया करते थे।


वैसे मुझे बीते दस सालों की कुछ यादें हैं। तुम्हारा जन्मदिन तुम्हारे मूड के हिसाब से होता था। हम लोग हर बार केक ज़रूर लाते और कोशिश करते थे मनाने की। जब मूड कुछ उखड़ा होता, तो मुंह फुला के केक काटा करते थे। और इसे फालतू की रस्म मान के नकार दिया करते थे।

पर हाँ ऐसे भी दिन रहें है, जब रजाई में घुस के सोने का नाटक करते हुए, तुमने इंतज़ार किया है की जल्दी से 12 बजें और हम लोग केक लेकर कमरे में पहुँचे। और तुम चौकने की एक्टिंग करो क्योंकि दरअसल फ्रिज में रखा केक तो तुमने शाम से ही देख लिया था।

खैर केक की क़िस्मत दोनों में से जो भी हो। रात का कार्यक्रम तो फिक्स था। या तो आर्यन जाके डिनर करना या फिर वहाँ से पैक करवाके आना।

मशरुम काली मिर्च, मिस्सी रोटी और माँ से छुप के चिकन सूप।

ख़ुद के जन्मदिन को तुमने कभी इतना तवज्जो दिया नहीं। पर मेरे बर्थडे पर तुम्हारा “Ha-i-ppppppy Birthday” बोलने का अंदाज़ आज भी मेरे कानों में गूँजता है।



तुम्हारे आख़िरी सालों में मैंने तुम्हारी आँखों में इस दिन को लेकर एक अजीब से मायूसी देखी थी। तुमने अक्सर कहा भी की बुढ़ापे में जन्मदिन ये एहसास करता है की अब समय कम है। इस पर मैंने हमेशा यहाँ कहा, की शुक्र मनाओ ईश्वर ने इतने साल दिए आपको। मेरी इस उम्र में ये कहना आसान है शायद, पर तुम्हारी उम्र तक क्या पता मुझे भी ऐसा ही कुछ डर लगे।

तुम्हारे आख़िरी जन्मदिन में मैं तुम्हारे साथ नहीं थी। पर मुझे ख़ुशी है, तुमने वो जन्मदिन वैसे ही मनाया जैसे तुम चाहते थे। घूमकर, थाईलैंड जाकर और अपना मनपसंद खाना खा कर।


इस साल तुम अगर होते, तो आज तुम्हारा जन्मदिन होता। और इस दिन मैं ज़रूर आती तुमसे मिलने और ख़ुद से बनाके के लाती केक। इस बार तुम्हारी गोद में बैठाती रूमी को और तब हम केक काटते।

और मुझे पता है, केक काटकर फट से तुम थोड़ा सा रूमी को खिलाने बढ़ते और माँ पीछे से टोकती, ”अरे अभी इसका अन्नप्राशन नहीं हुआ है। कैसे खा लेगा!”

और एक बार फिर तुम अपने जन्मदिन पर थोड़ी देर के लिए रूठ जाते।

पर तब भी रात के खाने में फिर होता मशरुम काली मिर्च, मिस्सी रोटी और चिकन सूप।

मेरे प्यारे पिता,

अगर तुम यहाँ होते, तो आज तुम्हारा जन्मदिन होता!

 
 
 

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